75 ઓ બાબુલ પ્યારે


ओ बाबुल प्यारे…
ओ रोए पायल की छम छम
ओ सिसके सांसों की सरगम
ओ निस दिन तुझे पुकारे मन, हो
ओ बाबुल प्यारे…

तेरी ही बाहों में बचपन बीता,
खिलती गयी ज़िंदगानी
हो, आंधी ऐसी फिर चली,
टूटी डाली से कली
बिन सावन के उजड़ा चमन, हो
ओ बाबुल प्यारे…

कैसे सुहागन बने ये अभागन,
कौन बिठाए डोली
कैसे आएगी बारात,
कैसे पीले होंगे हाथ
कैसे बेटी बनेगी दुल्हन, हो
ओ बाबुल प्यारे…

जनक ने कैसे त्याग दिया है,
अपनी ही जानकी को
हो, बेटी भटके राहों मे,
माता डूबी आहों में
तरसे तेरे दरस को नयन, हो
ओ बाबुल प्यारे…


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